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मीटिंग टेबल के आसपास टीम, एक प्रोजेक्ट की योजना बनाते हुए

हमारी कहानी

1970 में अंधेरी का एक फ़ोटो स्टूडियो, एक बेटा जो वहाँ की सीख को विज्ञापन और बिज़नेस तक ले गया, और एक पोता जो अब सॉफ़्टवेयर डिज़ाइन करता है। संस्थापक विशाल किरण शर्मा की ज़ुबानी।

  1. किरण के. शर्मा का पोर्ट्रेट

    1970 · अंधेरी

    मेरे पिता ने एक स्टूडियो खोला।

    मेरे पिता, किरण के. शर्मा, ने फ़ोटोग्राफ़ी मित्तर बेदी से सीखी, जो भारत के नए कारख़ानों की तस्वीरें उसी श्रद्धा से खींचते थे जैसे लोग मंदिरों की खींचते हैं। उनसे मेरे पिता ने धैर्य सीखा: तब तक देखते रहो जब तक सामने वाली चीज़ ख़ुद न बता दे कि वह क्या है। 1970 में उन्होंने अंधेरी में स्टूडियो किरण खोला और यही धैर्य शादियों पर लगाया, जो कारख़ानों से कहीं ज़्यादा मुश्किल होती हैं। कुछ भी स्थिर नहीं रहता, हर कोई घबराया होता है, और दूसरा टेक नहीं होता।

    पचास साल में स्टूडियो सत्तर फ़ोटोग्राफ़रों और कलाकारों तक पहुँचा, और काम भी बढ़ा: विज्ञापन, ब्रांड फ़िल्में, और संस्थानों का वह ख़ामोश काम जिसे कोई फ़्रेम नहीं करता पर सबको ज़रूरत होती है। तरीक़ा कभी नहीं बदला। पहले इंसान को ठीक से देखो। फिर शटर दबाओ।

  2. विशाल किरण शर्मा का पोर्ट्रेट

    1999 · दुनिया में क़दम

    मैं उसी के भीतर बड़ा हुआ।

    जब से मुझे याद है, मैं उस स्टूडियो का हिस्सा रहा हूँ। इसका मतलब है कि ब्रीफ़ क्या होता है, यह जानने से बहुत पहले मैंने जान लिया था कि ख़राब तस्वीर क्या होती है। ख़राब तस्वीर वह है जिसमें इंसान सच में मौजूद न हो। बाक़ी सब तो उपकरण हैं।

    मेरा अपना काम 1999 में फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़ी से शुरू हुआ, 2001 में विज्ञापन फ़िल्मों तक और 2006 से एजेंसियों तक पहुँचा। फिर मैंने कुछ ऐसा किया जिसका कैमरे से कोई लेना-देना नहीं था: मैंने कंपनियाँ बनाईं। मोबाइल एक्सेसरीज़ में Papa Brands, और बाद में Timbresonic। बिज़नेस चलाना अपने आप में एक पढ़ाई है। आप सीखते हैं कि सॉफ़्टवेयर किसलिए होता है, जब आप ऐसे सॉफ़्टवेयर के पैसे भरते हैं जो आपसे लड़ता है। आप सीखते हैं कि जो सिस्टम लोगों के हिसाब से नहीं बना, लोग उससे बचने का रास्ता निकाल ही लेते हैं। और आप सीखते हैं कि लोग जो कहते हैं कि उन्हें चाहिए, और वे दिन भर असल में जो करते हैं, उन दोनों के बीच का फ़ासला ही वह जगह है जहाँ हर नाकाम प्रोजेक्ट रहता है।

    उन्हीं सालों में मैंने स्टूडियो किरण को पारंपरिक सेट-अप से डिजिटल पर भी पहुँचाया। बाद में समझ आया कि वह अभ्यास था।

  3. कॉन्फ़्रेंस टेबल पर प्रोग्राम के दस्तावेज़ देखते अधिकारी

    New Vishal Vision

    फिर मैं सब कुछ वापस लेकर आया।

    New Vishal Vision में स्टूडियो की आदत भी है और वह सब भी जो मैंने बाहर सीखा। किसी कॉलेज के लिए बनी फ़िल्म भी आख़िर एक पोर्ट्रेट है: इंसान को सही पकड़ो, बाक़ी अपने आप हो जाता है। किसी स्किलिंग मिशन का लर्निंग प्रोग्राम राज्य-स्तर की शादी जैसा है: सैकड़ों सेंटर, कई भाषाएँ, दूसरा टेक नहीं, और लेंस के उस पार किसी की रोज़ी-रोटी। इसलिए स्क्रिप्ट लिखने से पहले हम वर्कशॉप और क्लासरूम जाते हैं, क्योंकि लोग वहीं होते हैं।

    सॉफ़्टवेयर भी इसी तरह आया। हमने रियल एस्टेट के लिए REOS और शादियों व पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए BandhanLive इसलिए बनाए, क्योंकि हम दूसरों के सिस्टम से जूझते-जूझते थक गए थे। और हम क्लाइंट्स के लिए वैसे ही बनाते हैं जैसे मेरे पिता तस्वीर खींचते थे: पहले देखो, फिर बनाओ।

  4. सानिध्य विशाल शर्मा का पोर्ट्रेट

    आज · तीसरी पीढ़ी

    और अब मेरा बेटा।

    सानिध्य हमारे सॉफ़्टवेयर का डिज़ाइन संभालता है। जहाँ उसके दादा के हाथ में कैमरा था, वहाँ उसके सामने स्क्रीन है, और उसकी परवरिश भी उसी सवाल के साथ हुई: यह किसके लिए है, और क्या हमने सच में उन्हें देखा है?

    तीन पीढ़ियाँ। एक आदत। उपकरण बदलते रहते हैं। सवाल नहीं बदलता।

विशाल किरण शर्मासंस्थापक, New Vishal Vision

तीन सेवाएँ, काम करने का एक तरीक़ा: जिसके लिए बना रहे हैं उसे ध्यान से देखो, पहले कुछ छोटा दिखाओ, फिर पूरी तरह बनाओ।

लोग

काम के पीछे के लोग।

  • विशाल किरण शर्मा का पोर्ट्रेट

    विशाल किरण शर्मा

    संस्थापक

    NVV का रोज़ का काम चलाते हैं और हर क्लाइंट से रिश्ता ख़ुद संभालते हैं।

  • किरण के. शर्मा का पोर्ट्रेट

    किरण के. शर्मा

    संस्थापक मेंटर, क्रिएटिव व विज़ुअल स्टोरीटेलिंग

    1970 में अंधेरी में स्टूडियो किरण खोला। कैमरे के पीछे पचास साल, और यही वजह है कि हम शूट करने से पहले देखते हैं।

  • अरुण कुमार मेनन का पोर्ट्रेट

    अरुण कुमार मेनन

    मेंटर, सॉफ़्टवेयर व टेक्नोलॉजी

    आर्किटेक्चर, प्रोडक्ट के फ़ैसलों और बाज़ार तक पहुँचने की रणनीति पर हमारी सॉफ़्टवेयर टीम का मार्गदर्शन करते हैं।

  • सानिध्य विशाल शर्मा का पोर्ट्रेट

    सानिध्य विशाल शर्मा

    सॉफ़्टवेयर डिज़ाइन प्रमुख

    हमारे क्लाइंट सॉफ़्टवेयर और REOS व BandhanLive के प्रोडक्ट व इंटरफ़ेस डिज़ाइन का नेतृत्व करते हैं।

  • सूरज चित्रे का पोर्ट्रेट

    सूरज चित्रे

    क्रिएटिव सलाहकार, फ़िल्म व ब्रांडेड कंटेंट

    ब्रांड फ़िल्मों और डॉक्यूमेंट्री कहानियों के फ़िल्मकार और कंटेंट रणनीतिकार।

  • साइकत बागबान का पोर्ट्रेट

    साइकत बागबान

    क्रिएटिव सलाहकार, कमर्शियल

    टीवी, डिजिटल और ब्रांडेड कंटेंट के कमर्शियल डायरेक्टर।

कुछ संस्थाएँ जिनके साथ हमने काम किया है

  • TCS
  • Reliance Energy
  • SVKM
  • Wella India
  • MIDC
  • MIHAN
  • iBall
  • Thakur Group
  • R. C. Patel Institute
  • Ampersand Group
  • Skill Tree Consulting
  • Leadspire

मिलने आइए।

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